Wednesday, 25 September 2013

वो तंग करें और हम प्रेम करें...

हर रिश्ते में हम यही चाहते हैं कि दूसरा हमें समझे, और वैसा ही बरताव करे जैसा हम चाहते हैं। जब ऐसा नहीं हो पाता तो रिश्ते में कड़वाहट और फिर दरार आनी शुरु हो जाती है। अगर हम उस दरार को बढ़ने से रोक नही पाए तो रिश्ते टूट भी जाते हैं ।

आप इस दुनिया में ज़िंदगी जी रहे हैं तो जाहिर है कई तरह के पेचीदा रिश्ते बनते ही रहेंगे। आपको लोगों की सीमाओं और क्षमताओं को समझना होगा, और फिर सोचिए कि आप क्या कर सकते हैं; जो आप कर सकते हैं वो करिए। तभी आपको हालात को अपने मुताबिक बदलने की शक्ति मिल पाएगी। अगर आप इस बात का इंतज़ार करेंगे कि लोग आपको जान-समझ कर आपके मुताबिक काम करेंगे तो यह बस खयाली पुलाव है; ऐसा कभी नहीं होने वाला।


रिश्ते जितने करीबी होंगे उनको समझने के लिए आपको उतनी ही ज़्यादा कोशिश करनी होगी। एक आदमी के साथ ऐसा हुआ कि वह कई महीनों के लिए ‘कोमा’ में जाता और फिर होश में आ जाता। ऐसा काफी दिनों से चलता आ रहा था। उसकी पत्नी दिन-रात उसके सिरहाने बैठी रहती। एक बार जब उसको होश आया तो होशो-हवास के कुछ ही पलों में उसने अपनी पत्नी को और पास आने का इशारा किया। जब वह उसके करीब बैठ गयी तो उसने कहना शुरु किया, “मैं सोचता रहा हूं……… तुम मेरी ज़िंदगी के हर बुरे दौर में मेरे साथ रही हो। जब मेरी नौकरी छूट गयी तो तुम मेरे साथ थी। जब मेरा कारोबार ठप्प हो गया तो तुम दिन-रात काम करके घर चलाती रही। जब मुझे गोली मारी गयी तब भी तुम मेरे पास थी। जब उस कानूनी लड़ाई में हमने अपना घर खो दिया तब भी तुम मेरे बिल्कुल पास थी। अब मेरी सेहत कमज़ोर हो चली है तब भी तुम मेरे बगल में हो। जब मैं इन सब बातों पर गौर करता हूं तो मुझे लगता है कि तुम मेरे लिए हमेशा दुर्भाग्य ही लाती रही हो!”


ऐसा नहीं है कि दूसरे इंसान में समझदारी नाम की कोई चीज़ ही नहीं है। अपनी समझदारी से आप ऐसे हालात पैदा कर सकते हैं कि दूसरा इंसान आपको बेहतर ढंग से समझ सके। दूसरे इंसान की सीमाओं को समझे बिना, उसकी जरूरतों को जाने बिना, उसकी काबिलियत और संभावनाओं को आंके बिना अगर आप यह उम्मीद करते हैं कि वह हरदम आपको जान-समझ कर आपके अनुसार चलता रहे, तो फिर लड़ाई के अलावा और क्या होगा! यह तो होना ही है। ऐसा इसलिए होता है कि आपकी और उनकी सोच की सीमा-रेखा बिलकुल अलग-अलग है। अगर आप इस एल.ओ.सी. को पार कर जाएंगे तो फिर उनको गुस्सा आना लाजिमी है। और अगर वे पार करें तो आपका नाराज़ होना लाजिमी है।

अगर आप अपनी समझ की सीमा को इतना बढ़ा लें की उनकी समझ भी उसमें समा जाए तो आप उनकी सीमाओं और क्षमताओं को अपना सकेंगे। हर इंसान में कुछ चीज़ें सकारात्मक होती हैं और कुछ नकारात्मक। अगर आप इन सब चीज़ों को अपनी समझ में शामिल कर लेंगे तो आप रिश्ते को अपने मुताबिक ढाल सकेंगे। अगर आप इसको उनकी समझ पर छोड़ देंगे तो यह महज संयोग होगा कि कुछ अच्छा हो जाए। अगर वे उदारमना हैं तो आपके लिए सब-कुछ बहुत अच्छा होगा और नहीं तो रिश्ता टूट जाएगा।

मैं आपसे बस यह पूछ रहा हूं: क्या आप चाहते हैं कि आप खुद इस बात को तय कर सकें कि आपकी ज़िंदगी के साथ क्या हो? रिश्ते चाहे निजी हों या व्यावसायिक, राजनीतिक, या किसी और तरह के हों, क्या आप नहीं चाहते कि ये आप तय करें कि आपकी ज़िंदगी में क्या होना चाहिए? अगर आप ऐसा चाहते हैं तो ये ज़रूरी है कि आप हर चीज़ और हर इंसान को अपनी समझ में शामिल कर लें। आपको अपनी समझ का दायरा इतना ज़्यादा बढ़ाना होगा कि आप लोगों के पागलपन तक को समझ सकें। आपके इर्द-गिर्द बड़े अच्छे लोग हैं जो कभी-कभार कुछ पलों के लिए पगला जाते हैं। अगर आप यह बात नहीं समझेंगे, उनके पागलपन को नहीं समझेंगे तो उनको निश्चित रूप से खो देंगे। अगर समझते हैं तो फिर यह भी आप जान जाते हैं कि उनसे कैसे पेश आया जाए।

ज़िंदगी हमेशा सीधी लकीर की तरह नहीं होती। इसे चलाने के लिए आपको बहुत-कुछ करना होता है। अगर आप अपनी समझ को किनारे कर देंगे तो आपकी काबिलियत घट जाएगी। सवाल चाहे निजी रिश्तों का हो या फिर व्यावसायिक प्रबंधन का दोनों के लिए आपको एक विशेष समझ चाहिए; वरना आपके रिश्ते कामयाब नहीं हो पायेंगे।



22 comments:

  1. Kaash Mujhe Sher Likhna Aata
    To Kitna Pyaar Hai Tujhse Yeh Jata Paata..

    Chaha To Tujhe Kitna Hai Janam
    Kash Ye Lafzon Me Kah Pata

    Humne Na Chahi Thi Kabhi Ruswayee
    Par Kismat Ne Aisi Palat Khai
    Ki Mili To Bas Tanhayee..

    Teri Yaad Agar Hoti Jeene Ko Kaafi
    To Main Sah Leta Woh Ruswayee..

    Humare Bin Na Rah Saki Tu Chaar Din
    Kitni Baar Ji Hai Tu Yeh To Gin..

    Zinda Hu Main Ishq Ke Sath
    Jeene Ki To Tu Karti Thi Baat..

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  2. samjhaute ka hi dushra pahlu aapsi taalmel hota hai. Aapsi taalmel ka matlab hai aapsi sujhbujh. Aur aapsi sujhbujh ek dusre ki baat samjh kar hi ki ja sakti hai.

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  3. good post sumit
    keep it up

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  4. Rishte kisi ke bharose nahi chhode jate
    jo bhi karna hai wo hame hi karna hai..
    Otherwise un rishto ki hum apni aankho ke samne tut'te dekhte hain..

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  5. rishton ke hain roop anek
    rishton ki pehchan hai apni
    rishton ko, agar koi samjhe
    to,rishton ki shaan hai apni..

    mata pita bachchon ka rishta
    bhai aur behan ka rishta
    bhai aur bhai ka rishta
    her rishte ki katha hai apni
    ek rishta manavta ka bhi
    priya aur priatam ka rishta
    her rishte ki vyatha hai apni..

    jab koi rishta tode vo rabb
    manav dard na seh pata hai
    jaan bujh kar fir bhi vah par
    khud rishton ko jhuthlata hai
    ooper se hai pyar dikhaye
    man me jahar bhara rehta hai
    rishte mange hai kurbani
    per koi, kya ye, de pata hai?

    swarth chodo lalach chodo
    rishton ki kimat pehchano
    jinke pass na hota ye sukh
    koshish kar vo dard bhi jano..

    agar pyar se nibh jaoge
    rishton ko agar ji jaoge
    aakhir samay abhilashi man me
    jaane ka dukh na hoga
    rishton ka ehsas to hoga
    apnepan ka Aabhas bhi hoga
    apnepan ka Aabhas bhi hoga..

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    Replies
    1. VERY NICE LINES OR ACHE SE KHU TO BHUT KHUB AND ACHA LIKHA H G APNE

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  6. great article..
    riste aur payaar ke bina ye jeevan me sab soony hae..
    prathamprayaas.blogspot.in-

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  7. संबंधों में शांति पूर्वक रहना बहुत कठिन है। लेकिन वही चुनौती है। यदि तुम उससे बचते हो तो तुम परिपक्वता से वंचित रह जाओगे। यदि तुम समूची पीड़ा के साथ उसमें उतरोगे, और फिर भी उसमें जाते रहोगे तो धीरे-धीरे वह पीड़ा एक आशीष बन जाती है, अभिशाप वरदान बन जाता है। धीरे-धीरे संघर्ष के द्वारा, घर्षण के द्वारा केंद्रीकरण होता है।उस संघ के द्वारा तुम अधिक सजग, अधिक सावचेत हो जाते हो।दूसरा व्यक्ति तुम्हारे लिए आईना बन जाता है। तुम अपनी कुरूपता दूसरे में प्रतिफलित हुाई देख सकते हो। दूसरा तुम्हारे अचेतन को उकसाता है, उसे सतह पर लाता है। तुम्हें अपने अंतरतम के सभी छुपे हुए हिस्सों को जानना होगा, और उसका सबसे आसान तरीका है प्रतिफलित होना, संबंध के दर्पण में झांकना। मैं इसे सरल कहता हूं क्योंकि इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है लेकिन है यह बहुत दूभर, कठिन क्योंकि इसके द्वारा खुद को बदलना होगा।

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  8. rishto ki ahmiyat samjhne wala hi rishto ko aage le ja sakta hai......

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  9. very nice article ..avantika

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